तेरे इन्तजार मे लगा था बुझ गयी है अब अगन बाकी तो है नज़र बस दर पे अटकी है लगन बाकी तो है देख सब कुछ लिया कुछ लुभाता ही नहीं तुझे सोचा तो दिल उछला जीवन बाकी तो है उम्र थक थक चली भूख कम कम लगे प्यास तेरी ऐसे जागी ये तन बाकी तो है कहीं हम ऐसे खोए हैं कि सब अहसास सोए हैं तेरा इक तल्ख ताना हाय चुभन बाकी तो है । तु मुझमे ढल गयी है मैं तुझमें घुल गया हु पर हो जिक्र में कोई भी जलन बाकी तो है | Pankaj Jain 7066045880
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