तेरे इन्तजार मे
अगन बाकी तो है
नज़र बस दर पे अटकी है
लगन बाकी तो है
देख सब कुछ लिया
कुछ लुभाता ही नहीं
तुझे सोचा तो दिल उछला
जीवन बाकी तो है
नज़र बस दर पे अटकी है
लगन बाकी तो है
उम्र थक थक चली
भूख कम कम लगे
प्यास तेरी ऐसे जागी
ये तन बाकी तो है
नज़र बस दर पे अटकी है
लगन बाकी तो है
कहीं हम ऐसे खोए हैं कि
सब अहसास सोए हैं
तेरा इक तल्ख ताना हाय
चुभन बाकी तो है ।
नज़र बस दर पे अटकी है
लगन बाकी तो है
तु मुझमे ढल गयी है
मैं तुझमें घुल गया हु
पर हो जिक्र में कोई भी
जलन बाकी तो है |
नज़र बस दर पे अटकी है
लगन बाकी तो है
Pankaj Jain
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