Skip to main content

Posts

Showing posts from November, 2025

अब कुछ भी, देर तक

अब कुछ भी, देर तक गलत, ना सही लगता है। ख़ुद के झान्से में मत आ फिर, यही लगता है। कहानी सपने दिखाती थी, कविता झकझोर देती थी। अब कुछ नहीं,हर फ़लसफ़ा, सतही लगता है। गुस्सा चिड़चिड़ में बदल गया, मोहब्बत बदली तानों में। नया कुछ करो फिर भी सब, वही वही लगता है। अब कुछ भी, देर तक गलत, ना सही लगता है। ख़ुद के झान्से में मत आ फिर, यही लगता है।

वक़्त की धार में बह जा रे

तु जिससे लड़ रहा था वो तो बह गया , जो तुझसे लड़ रहा था वो भी बह गया, तु जिसको चाहता था उसको खोजे जो तुझ को चाहता था तुझ को खोजे ग़म हो खुशी हो,बहते वक़्त में टिकती नहीं है  किसी बाज़ार में क्यों राहते बिकती नहीं है वक़्त की धार में सब बह के बदल जाते है कुछ पीछे रहे,कुछ आगे निकल जाते हैं, वो कड़वी याद और वो डर कोई भूल कैसे भुला के कल को कहो,आज को जी ले कैसे तो  क्या किसी की भूल की ताउम्र सजा लोगे तुम ऐसे ज़िन्दगी का क्या खाक मज़ा लोगे तुम क्या कभी दुनिया की भूलों में कुछ कमी होगी क्या तेरे दिल में गुस्सा,आंख में बस नमी होगी ये सब भूलना आसा नहीं है,मुश्किल भी नहीं है रास्ते इसलिए खोए है क्युकी मंज़िल भी नहीं है कोई नादान छोटू ख्वाब ही फिलहाल काफी है जो गिला न  शिकवा न हो वो खयाल काफी है छोड़ो तो सब छूटे,यू भी कौन पकड़ पाया है वक़्त के आगे, मै तू क्या,कौन अकड़ पाया है समय की धार में बह जा रेे पगले कहीं पहुंचे न पहुंचे, राह के नज़ारे तेरे है कोई नाराज़ ऐसा है कि वो नाराज़ रह जाए अगर तू प्यार से देखे तो बाकी सारे तेरे है

बाहर बाहर पूजे मुझको दुनिया रे

बाहर बाहर पूजे मुझको दुनिया रे भीतर भीतर घुरे मोरा मनवा रेे दुनिया जो रूसे तो फिर भी चल जाए मनवा ना माने तो कुछ ना चलना रे कुछ कुछ तुझसे कहता रहता ये दिल है ज़रा ठहर सुन ले  मानाकि मुश्किल है तू जाने किस किस गिनती में भागे रे दुनिया बोले रहना सबसे आगे रे जी भर ना खा पाया ना तू सो पाया रोज़ ही एक नई उलझन में जागे रे खुदा के नाम पे गिनती वफा के नाम पे गिनती कभी वॉट्सएप पे ट्वीटर पे या इंस्टाग्रम पे गिनती  दौलत की गिनती में डरता रह गया शोहरत की गिनती में उलझा रह गया रिश्तों की गिनती में लाइक्स बढ़ा लिए  फोन में घुस के गहरे रिश्ते गवां दिए जी चाहे तो हिमालय पर चढ़ जाना जी ना चाहे आंगन में ही पसर जाना दुनिया भर में एक अपना सा काफी है साथ जो कोई है तो डर ना लगना रे कोई पल पाए पहले खुद जी लेना फिर पगले जी चाहे तो सेल्फी लेना  इस पल पल में पहले गहरा उतरना है खुद ना भोगा वो क्या शेयर करना है 

new Ghazal yaki nahi he

किसी को भी ,किसी पे भी कोई यकीं नहीं है हां,मिलने जुलने वालो की कोई कमी नही है कोई मिला अच्छा लगा बस चार हफ्तों तक कब कहा गलत है वो,लेकिन सही नही है क्या लेने चले थे और क्या क्या हासिल कर लिया जो एक चीज दिल को छू पाती,बस वही नही है उसे जाने,भरोसा करके दिल की बात कह डाले इसमें वक्त लग जाता है जो शायद अभी नहीं है  क्यो उतना और भागे हर दफे मायूस हो हो कर हमे मालूम है जो ढूंढते है अब तो कही नही है लड़ना हो, हंसना रोना हो,पर खालीपन ना हो मेरे घर दोस्त है, दुश्मन है मगर अजनबी नही है किसी को भी ,किसी पे भी कोई यकीं नहीं है हां,मिलने जुलने वालो की कोई कमी नही है Muzpe yakin ghat raha he faasle badha lo, Mere alaawa aur kahin kuchh silsile bana lo, Umra bhar ki ye ghutan Jaan hi le legi, Behtar yahi he kuchh dino ki taklife utha lo.